Music MCQ (64 Qu.) : प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है। प्रश्न और उसके दिए गए विकल्पों पर क्लिक कर टेस्ट दें और अपना रिजल्ट चेक करें।
अलंकार किस भाषा का शब्द है?
संस्कृत
हिंदी
फारसी
उर्दू
संस्कृत
अलंकार संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ आभूषण या गहना होता है। संगीत में यह स्वरों का विशिष्ट क्रम होता है।
UP TGT Music 2016
अलंकार के कितने भाग हैं?
4
3
1
2
4
अलंकार के मुख्य 4 भाग होते हैं: स्थाई, आरोही, अवरोही, और संचारी।
KVS TGT Music 2018
सरल, अर्ध-जटिल, जटिल, मेरूखंड – ये सब किसके वर्ग हैं?
आलाप
तान
अलंकार
गमक
अलंकार
सरल, अर्ध-जटिल, जटिल और मेरूखंड अलंकार के विभिन्न प्रकार या वर्ग माने जाते हैं।
NVS Music Teacher 2019
आलाप से क्या-क्या दर्शाया जा सकता है?
राग की जाति
राग का चलन
राग का स्वरूप
उपयुक्त सभी
उपयुक्त सभी
आलाप के माध्यम से राग की जाति, उसका चलन और राग का सम्पूर्ण स्वरूप दर्शाया जाता है।
DSSSB PRT Music 2021
आलाप किस-किस तरह गाया जा सकता है?
आकार के आलाप
नोम तोम के आलाप
शब्द के आलाप
उपयुक्त सभी
उपयुक्त सभी
आलाप को आकार (आ), नोम-तोम, और गीत के शब्दों के साथ (बोल-आलाप) गाया जा सकता है।
UGC NET Music 2020
कौन-सी ख्याल गायन शैली आलाप प्रधान होती है?
विलंबित ख्याल
द्रुत ख्याल
उपयुक्त दोनो
इनमे से कोई नही
विलंबित ख्याल
विलंबित ख्याल (बड़ा ख्याल) धीमी गति में गाया जाता है, इसलिए यह मुख्य रूप से आलाप प्रधान होता है।
UP PGT Music 2021
‘तान’ संस्कृत की किस धातु का शब्द है?
तान
तन
तः
इनमे से कोई नही
तन
तान शब्द की उत्पत्ति संस्कृत की 'तन्' धातु से हुई है, जिसका अर्थ है तानना या विस्तार करना।
RPSC School Lecturer Music 2018
तान के कितने प्रकार हैं?
12
21
19
4
19
भारतीय शास्त्रीय संगीत में तान के मुख्य रूप से 19 प्रकार माने गए हैं (जैसे शुद्ध तान, कूट तान, मिश्र तान आदि)।
KVS PGT Music 2017
आलाप और तान में किसका अंतर होता है?
श्रुति
लय
स्वर
राग
लय
आलाप धीमी गति (लय) में गाया जाता है, जबकि तान द्रुत (तेज) लय में गाई जाती है।
NVS Music 2019
एक स्वर की ध्वनि को दूसरे स्वर से बिना खंडित किए हुए मिलाना क्या कहलाता है?
आलाप
तान
मींड
गमक
मींड
जब एक स्वर से दूसरे स्वर तक बिना ध्वनि तोड़े (अखंडित रूप से) खिसकते हुए जाते हैं, तो उसे मींड कहते हैं।
DSSSB PRT Music 2018
मींड के कितने प्रकार होते हैं?
3
4
1
2
2
मींड के 2 प्रकार होते हैं: अनुलोम मींड और विलोम मींड।
UGC NET Music 2019
सही मिलान कीजिये-
1. अनुलोम -> 1. अवरोही क्रम
2. विलोम -> 2. सा से म मींड
3. मींड -> 3. स्वरों पर उल्टा चिन्ह
4. अनुलोम -> 4. आरोही क्रम
1. अनुलोम -> 1. अवरोही क्रम
2. विलोम -> 2. सा से म मींड
3. मींड -> 3. स्वरों पर उल्टा चिन्ह
4. अनुलोम -> 4. आरोही क्रम
1- 2, 2-3, 3-4, 4-1
1-3, 2-1, 3-2, 4-4
1-4, 2-1, 3-3, 4-2
1-4, 2-3, 3-1, 4-2
1-4, 2-1, 3-3, 4-2
अनुलोम आरोही क्रम (4) से, विलोम अवरोही क्रम (1) से, मींड का प्रतीक उलटा अर्द्धचंद्राकार (3) होता है।
UP TGT Music 2016
गमक की विशेषता तथा गमक के कितने प्रकार हैं?
स्वरों का कम्पन्न – 12 प्रकार
स्वरों का वक्र रूप- 19 प्रकार
स्वरों का कंपन – 15 प्रकार
स्वरों का कोमल रूप- 15 प्रकार
स्वरों का कंपन – 15 प्रकार
गमक में स्वरों को विशिष्ट प्रकार से कंपित किया जाता है। प्राचीन ग्रन्थों में गमक के 15 प्रकार बताए गए हैं।
UGC NET Music 2018
रूपक ताल में कितनी मात्राएं हैं?
7
14
10
16
7
रूपक ताल में कुल 7 मात्राएं होती हैं।
KVS TGT Music 2018 | BPSC Music 2023
रूपक ताल में मात्राओ के कितने विभाग हैं?
2, 3, 2, 3 मात्राओं के 4 विभाग
2, 2, 3 मात्राओ के 3 विभाग
3, 2, 2 मात्राओ के 3 विभाग
5, 2, 3, 4 मात्राओ के 4 विभाग
3, 2, 2 मात्राओ के 3 विभाग
रूपक ताल 7 मात्राओं की होती है, जिसे 3, 2, 2 के 3 विभागों में बांटा गया है (ती ती ना | धी ना | धी ना)।
NVS Music 2019
रूपक ताल में कितनी ताली और खाली है?
1 ताली और 2 खाली
2 ताली और 2 खाली
0 ताली और 3 खाली
2 ताली और 1 खाली
2 ताली और 1 खाली
रूपक ताल में 2 ताली (4थी और 6ठी मात्रा पर) तथा 1 खाली (पहली मात्रा / सम पर) होती है।
DSSSB Music 2021
किस ताल में पहली मात्रा पर खाली (0) को लेकर विद्वानों में मतभेद है?
झपताल
रूपक ताल
धमार ताल
इनमे से कोई नही
रूपक ताल
रूपक एकमात्र ऐसा प्रचलित ताल है जिसके 'सम' (पहली मात्रा) पर खाली दिखाया जाता है, इसे लेकर कुछ विद्वान मतभेद रखते हैं।
UP PGT Music 2016
झप ताल में कितनी-कितनी मात्राओं के कितने विभाग हैं?
2, 3, 2, 3 मात्राओं के 4 विभाग
3, 2, 3, 2 मात्राओं के 4 विभाग
5, 2, 3, 4 मात्राओं के 4 विभाग
2, 2, 3, 3 मात्राओं के 4 विभाग
2, 3, 2, 3 मात्राओं के 4 विभाग
झपताल 10 मात्राओं का ताल है, जिसमें 2, 3, 2, 3 के क्रम में 4 विभाग होते हैं।
UGC NET Music 2020
झप ताल में सम को छोडकर कौन-कौन सी मात्राओं पर ताली तथा कौन-कौन सी मात्राओं पर खाली हैं?
3, 8 पर ताली, 6 पर खाली
4, 6 पर ताली, 2 पर खाली
6, 11 पर ताली, 8 पर खाली
उपयुक्त में से कोई नही
3, 8 पर ताली, 6 पर खाली
झपताल में 1, 3 और 8वीं मात्रा पर ताली तथा 6ठी मात्रा पर खाली होती है।
BPSC Music Teacher 2023
धमार ताल में कितनी-कितनी मात्राओं के कितने विभाग हैं?
2-2 मात्राओ के 7 विभाग
4-4 मात्राओ के 4 विभाग
5, 2, 3, 4 मात्राओ के 4 विभाग
2, 3, 4, 5 मात्राओं के 4 विभाग
5, 2, 3, 4 मात्राओ के 4 विभाग
धमार ताल कुल 14 मात्राओं का होता है, जिसे 5, 2, 3, 4 के 4 विभागों में बांटा जाता है।
KVS PGT Music 2018
धमार ताल में कौन-कौन सी मात्राओं पर ताली तथा खाली आती हैं?
1, 6, 12 पर ताली, 8 पर खाली
1, 5, 11 पर ताली, 7 पर खाली
6, 12 पर ताली, 5 पर खाली
1, 6, 11 पर ताली, 8 पर खाली
1, 6, 11 पर ताली, 8 पर खाली
धमार ताल में पहली, 6ठी और 11वीं मात्रा पर ताली और 8वीं मात्रा पर खाली होती है।
NVS Music 2016
धमार ताल मे अवग्रह चिन्ह (S) कितनी बार आता है?
2
3
1
4
2
धमार ताल के बोलों में अवग्रह (S) 2 बार आता है (7वीं और 14वीं मात्रा पर)।
UP TGT Music 2021
हिन्दुस्तानी संगीत का सबसे पुराना घराना है?
ग्वालियर घराना
आगरा घराना
लखनऊ घराना
जयपुर घराना
ग्वालियर घराना
ग्वालियर घराना हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत (ख्याल गायकी) का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक घराना माना जाता है।
KVS TGT Music 2018
इनमें से कौन सा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन (ख्याल) का मुख्य घराना नहीं है?
लखनऊ घराना
किराना घराना
ग्वालियर घराना
आगरा घराना
लखनऊ घराना
ग्वालियर, आगरा और किराना हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत (ख्याल) के प्रमुख घराने हैं, जबकि लखनऊ घराना मुख्य रूप से कत्थक नृत्य, तबला और ठुमरी के लिए प्रसिद्ध है।
NVS Music 2019
ध्रुपद गायकी के लिए प्रसिद्ध घराना है?
मेवाती घराना
ग्वालियर घराना
जयपुर घराना
किराना घराना
ग्वालियर घराना
ग्वालियर घराना मूलतः ध्रुपद गायकी से जुड़ा हुआ था, बाद में यहीं से ख्याल गायकी का जन्म और विकास हुआ।
UGC NET Music 2018
बड़े गुलाम अली खान किस घराने से संम्बन्धित थे?
जयपुर घराना
ग्वालियर घराना
आगरा घराना
पटियाला घराना
पटियाला घराना
उस्ताद बड़े गुलाम अली खां हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के 'पटियाला घराने' के विश्व प्रसिद्ध गायक थे।
DSSSB Music Teacher 2021
सुप्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरजा देवी का संम्बंध किस घराने से है?
बनारस घराना
लखनऊ घराना
जयपुर घराना
किराना घराना
बनारस घराना
'ठुमरी की रानी' के नाम से विख्यात सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी का संबंध बनारस घराने से था।
KVS PGT Music 2017
पण्डित भीमसेन जोशी का संबंध किस कला से है?
बांसुरीवादन
ओडिसी नृत्य
हिन्दुस्तानी गायन
सितार वादन
हिन्दुस्तानी गायन
पंडित भीमसेन जोशी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत (किराना घराना) के एक महान गायक थे, जिन्हें 2008 में भारत रत्न मिला था।
UP TGT Music 2021
गायन की ध्रुपद शैली का आरम्भ/प्रसार किसने किया?
अमीर खुसरो
स्वामी हरिदास
तानसेन
विष्णु दिगम्बर पलुस्कर
स्वामी हरिदास
ध्रुपद शैली के प्राचीन विकास का श्रेय ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर और इसके प्रसार का मुख्य श्रेय तानसेन के गुरु 'स्वामी हरिदास' को दिया जाता है।
UGC NET Music 2019
वर्तमान समय में हिन्दुस्तानी संगीत की सर्वाधिक लोकप्रिय गायन शैली है?
ध्रुपद
ख्याल
ठुमरी
टप्पा
ख्याल
वर्तमान समय में उत्तर भारतीय (हिन्दुस्तानी) शास्त्रीय संगीत में 'ख्याल' गायन शैली सर्वाधिक लोकप्रिय है।
BPSC Music Teacher 2023
किस घराने को 'खयाल गायिकी' का जन्मदाता माना जाता है?
ग्वालियर घराना
किराना घराना
पटियाला घराना
आगरा घराना
ग्वालियर घराना
ग्वालियर घराने को हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में 'ख्याल' गायकी का जन्मदाता (सबसे प्राचीन घराना) माना जाता है।
NVS TGT Music 2016
ऋतु वर्मा का संबन्ध किस गायन शैली से है?
गजल गायिकी से
पंडवानी शैली से
कर्नाटक संगीत से
शास्त्रीय गायन से
पंडवानी शैली से
ऋतु वर्मा का संबंध छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक गायन शैली 'पंडवानी' से है। (तीजन बाई भी इसी शैली की प्रसिद्ध गायिका हैं)।
CGPSC 2018
संगीत के क्षेत्र में किस आविष्कार का श्रेय अमीर खुसरो को दिया जाता है? (1. सितार, 2. कव्वाली, 3. राग ख्याल, 4. राग तराना)
केवल 2, 3 और 4
1, 2, 3 और 4 सभी
केवल 1, 2 और 3
केवल 1, 3 और 4
1, 2, 3 और 4 सभी
अमीर खुसरो को सितार, तबला, कव्वाली, ख्याल और तराना जैसी कई संगीत शैलियों और वाद्यों के आविष्कार का श्रेय दिया जाता है।
UGC NET Music 2020
संगीतकार तानसेन का संम्बंध किन राज दरबारों से रहा है?
रीवा, ग्वालियर, और मुगल दरबार
ग्वालियर, मुगल, और मालवा दरबार
रीवा, मुगल, और मालवा दरबार
रीवा, ग्वालियर, और मालवा दरबार
रीवा, ग्वालियर, और मुगल दरबार
संगीत सम्राट तानसेन ने शुरुआत में ग्वालियर, फिर रीवा के राजा रामचंद्र के दरबार में और अंततः मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों के रूप में काम किया।
MPPSC 2016 | KVS Music 2018
भातखंडे (भरतखंडे) संगीत महाविद्यालय कहाँ स्थित है?
लखनऊ
अहमदाबाद
चंडीगढ़
इलाहाबाद
लखनऊ
भातखंडे संगीत संस्थान डीम्ड विश्वविद्यालय (Bhatkhande Music Institute) उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित है। यह संगीत शिक्षा का प्रमुख केंद्र है।
UP TGT Music 2021
अमीर खुसरो का नाम किस वाद्ययन्त्र के आविष्कार से प्रमुख रूप से संबंधित है?
सितार
वीणा
शहनाई
सरोद
सितार
अमीर खुसरो को प्रमुख रूप से 'सितार' और 'तबला' वाद्ययंत्रों के आविष्कार का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने वीणा में सुधार करके सितार बनाया था।
DSSSB Music 2018
राग-रागनियों का प्रथम बार विस्तृत विवेचन किस ग्रंथ में किया गया है?
भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में
नारद के संगीत मकरंद में
मतंग के बृहद्देशी में
शारंगदेव के संगीत रत्नाकर में
नारद के संगीत मकरंद में
भारतीय संगीत में राग-रागनियों (पुरुष और स्त्री राग) का प्रथम बार विस्तृत वर्गीकरण और विवेचन नारद मुनि द्वारा रचित 'संगीत मकरंद' में मिलता है।
UGC NET Music 2022
प्रात: काल (सुबह) के समय गाया जाने वाला राग कौन सा है?
राग टोड़ी
राग दरबारी
राग भोपाली
राग भीमपलासी
राग टोड़ी
'राग टोड़ी' और 'राग भैरव' को प्रातः काल के समय गाया जाता है। राग दरबारी मध्य रात्रि में, भोपाली शाम को और भीमपलासी दोपहर बाद गाया जाता है।
KVS TGT Music 2017
भारतीय शास्त्रीय संगीत के सिद्धांत की विवेचना किस वेद में की गयी है?
ऋग्वेद में
अथर्ववेद में
यजुर्वेद में
सामवेद में
सामवेद में
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति और इसके सिद्धांतों की विवेचना 'सामवेद' में की गई है। सामवेद को भारतीय संगीत का जनक माना जाता है।
UP PGT Music 2019
पण्डित भीमसेन जोशी के क्रियाकलाप (कार्य) का मुख्य क्षेत्र क्या रहा है?
साहित्य
शास्त्रीय संगीत
शिक्षा
पत्रकारिता
शास्त्रीय संगीत
पंडित भीमसेन जोशी भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत (किराना घराना गायन) कलाकार थे।
NVS Music 2019
निम्नलिखित में से कौन हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत (गायन) में सुविख्यात है?
शोभना नारायण
एम. एस. सुब्बलक्ष्मी
पण्डित जसराज
एम. एस. गोपालकृष्णन
पण्डित जसराज
पंडित जसराज मेवाती घराने के सुविख्यात 'हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक' थे। (एम. एस. सुब्बलक्ष्मी कर्नाटक संगीत से और शोभना नारायण कत्थक नृत्य से जुड़ी हैं)।
BPSC Music Teacher 2023
भारतीय शास्त्रीय संगीत (Vocal Music) का सबसे प्राचीन रूप कौन सा है?
गजल
ध्रुपद
ठुमरी
ख्याल
ध्रुपद
भारतीय शास्त्रीय गायन का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक रूप 'ध्रुपद' है, जिसकी उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है। इसके बाद ख्याल और ठुमरी का विकास हुआ।
UGC NET Music 2018
'संगीत रत्नाकर' ग्रंथ के लेखक कौन हैं?
पंडित आहोबल
तम्बरू
तानसेन
पंडित शारंगदेव
पंडित शारंगदेव
प्रसिद्ध ग्रंथ 'संगीत रत्नाकर' की रचना पंडित शारंगदेव ने की थी।
KVS TGT Music 2016
संगीत रत्नाकर ग्रंथ का रचनाकाल क्या है?
16वी शताब्दी
17वी शताब्दी
13वी शताब्दी
12वी शताब्दी
13वी शताब्दी
संगीत रत्नाकर 13वीं शताब्दी (लगभग 1210-1247 ई.) में लिखा गया था।
NVS Music 2018
संगीत रत्नाकर ग्रंथ में कितने अध्याय हैं तथा इस ग्रंथ को क्या नाम दिया गया है?
8 अध्याय, अष्टाध्यायी
7 अध्याय, सप्ताध्यायी
5 अध्याय, पंचाध्यायी
इनमे से कोई नही
7 अध्याय, सप्ताध्यायी
इसमें 7 अध्याय (स्वराध्याय, रागविवेकाध्याय, प्रकीर्णकाध्याय, प्रबन्धाध्याय, तालाध्याय, वाद्याध्याय, नर्तनाध्याय) होने के कारण इसे सप्ताध्यायी भी कहते हैं।
UGC NET Music 2021
संगीत रत्नाकर के 'स्वराध्याय' में किसके बारे में बताया गया है?
स्वर
श्रुति
जातियां
उपयुक्त सभी
उपयुक्त सभी
स्वराध्याय में नाद, श्रुति, स्वर, ग्राम, मूर्च्छना और जातियों का विस्तार से वर्णन है।
UP PGT Music 2020
संगीत रत्नाकर ग्रंथ के रागविवेकाध्याय में कितने रागों का वर्णन मिलता है तथा इसमें कितने भाग बताये गए हैं?
264 राग, 10 भाग
265 राग, 9 भाग
134 राग, 10 भाग
264 राग, 12 भाग
264 राग, 10 भाग
इसमें ग्राम राग, उपराग, भाषा, विभाषा, अंतरभाषा आदि 10 भागों में कुल 264 रागों का वर्गीकरण किया गया है।
RPSC Music 2018
संगीत रत्नाकर ग्रंथ के प्रकिर्णकाध्याय में वाग्गेयकार के कितने लक्षण बताए गए हैं?
12
23
28
30
28
प्रकीर्णकाध्याय में उत्तम वाग्गेयकार (जो गीत की रचना और स्वरलिपि दोनों बनाए) के 28 गुण/लक्षण बताए गए हैं।
UGC NET Music 2019
संगीत रत्नाकर ग्रंथ के प्रबंध-अध्याय में संगीत को कौन-कौन से भागों में बांटा है?
देशी और मार्गी संगीत
निबद्ध और अनिबद्ध संगीत
अल्पत्व और बहुत्व संगीत
इनमे से कोई नही
देशी और मार्गी संगीत
प्रबन्धाध्याय में मुख्य रूप से मार्गी (वैदिक) और देशी (लोक-प्रचलित) संगीत का वर्णन किया गया है।
DSSSB Music 2018
संगीत रत्नाकर ग्रंथ के तालाध्याय में ताल के किस अंग के बारे में वर्णित नहीं किया गया?
मात्राएँ, विभाग
ताली, खाली
उपयुक्त दोनो
सभी अंग वर्णित हैं
सभी अंग वर्णित हैं
तालाध्याय में मार्गी और देशी तालों, उनकी मात्रा, विभाग, ताली, खाली आदि सभी अंगों का विस्तृत वर्णन है।
KVS PGT Music 2019
संगीत रत्नाकर ग्रंथ के वाद्याध्याय में मुँह से हवा फूँकते हुए बजाए जाने वाले वाद्य किस श्रेणी में रखे गए हैं?
सुषिर वाद्य
तत-वितत वाद्य
घन वाद्य
इनमे से कोई नही
सुषिर वाद्य
फूँककर बजाए जाने वाले वाद्ययंत्रों (जैसे बांसुरी, शहनाई) को 'सुषिर वाद्य' कहा जाता है।
UP TGT Music 2016
संगीत रत्नाकर ग्रंथ के नृत्याध्याय में किसके बारे में बताया गया है?
नृत्य
नाट्य
उपयुक्त दोनों
इनमें से कोई नहीं
उपयुक्त दोनों
सातवें अध्याय (नर्तनाध्याय) में नृत्य (भाव-रहित) और नाट्य (भाव-युक्त अभिनय) दोनों का सविस्तार वर्णन है।
UGC NET Music 2022
संगीत रत्नाकर ग्रंथ में स्वरों की कितनी श्रुतियां तथा जातियां मानी गई हैं?
8 श्रुतियाँ 12 जातियां
12 श्रुतियाँ 18 जातियां
22 श्रुतियां 11 जातियां
22 श्रुतियां 18 जातियां
22 श्रुतियां 18 जातियां
शारंगदेव ने 22 श्रुतियों की स्थापना की तथा 18 प्रकार की जातियों (7 शुद्ध और 11 विकृत) का वर्णन किया है।
BPSC Music Teacher 2023
रागों को समय की दृष्टि से निर्धारित करने के लिए कितने सिद्धान्त माने गए हैं?
5
6
7
8
6
भारतीय संगीत में रागों के समय निर्धारण के मुख्य 6 सिद्धांत माने गए हैं।
DSSSB Music 2021
गीत के अर्थ पर रागों का समय कैसे निर्धारित किया जाता है?
गीत के स्वरूप पर
गीत के स्वरों पर
गीत के अर्थ पर
गीत के चलन पर
गीत के अर्थ पर
यदि गीत के बोलों (शब्दों) में सुबह, शाम या किसी विशेष प्रहर का वर्णन हो, तो उसी अर्थ के आधार पर समय निर्धारित होता है।
KVS TGT Music 2017
बसंत राग तथा मेघ मल्हार राग जैसे रागों को समय निर्धारण में किस श्रेणी में रखा जाना चाहिए?
गीत के अर्थ पर
ऋतु के अनुसार
उत्तरांग – पुर्वांग प्रबल अनुसार
स्वर संयोग के अनुसार
ऋतु के अनुसार
मेघ मल्हार (वर्षा ऋतु) और बसंत (वसंत ऋतु) को ऋतु-कालीन राग माना जाता है, इन्हें इनकी ऋतु में किसी भी समय गाया जा सकता है।
NVS Music 2018
उत्तरांग-पुर्वांग प्रबल सिद्धांत के अनुसार, जिन रागों का उत्तरांग प्रबल होता है वे किस समय गाए जाते हैं?
दिन के उत्तरार्ध में
दिन के पूर्वार्ध में
रात के तीसरे पहर में
संधि काल में
दिन के उत्तरार्ध में
उत्तरांग प्रधान रागों का गायन समय प्रायः दिन के उत्तरार्ध (दोपहर 12 से मध्यरात्रि 12) में होता है।
UGC NET Music 2020
वादी-संवादी सिद्धांत के अनुसार, जिन रागों का वादी स्वर सप्तक के उत्तरार्ध (उत्तरांग) में होता है, वह किस समय गाए जाते हैं?
रात 12:00 से दोपहर 12:00
दोपहर 12:00 से रात 12:00
संधि काल के समय
इनमें से कोई नहीं
रात 12:00 से दोपहर 12:00
उत्तरांग वादी स्वर (प, ध, नि, सा') वाले राग मध्यरात्रि 12 बजे से अगले दिन दोपहर 12 बजे तक गाए जाते हैं।
UP TGT Music 2019
मध्यम स्वर के समय निर्धारण के अनुसार जिन रागों में तीव्र मध्यम लगता है, उनका गायन समय क्या होता है?
दिन के समय
रात के समय
संध्या काल के समय
इनमें से कोई नहीं
रात के समय
प्रायः तीव्र मध्यम (म') वाले रागों का गायन समय रात्रि काल का होता है (जैसे यमन, बिहाग)।
KVS PGT Music 2018
स्वर संयोग सिद्धांत के अनुसार, जिन रागों में कोमल 'रे, ध' लगते हैं, वह किस समय गाए जाने चाहिए?
दिन के समय
रात के समय
संध्या काल के समय
इनमें से कोई नहीं
संध्या काल के समय
कोमल रे, ध वाले रागों को 'संधिप्रकाश राग' कहा जाता है, जो प्रातःकाल और सायं काल (संध्या समय) गाए जाते हैं।
BPSC Music 2023
स्वर संयोग सिद्धांत के अनुसार, जिन रागों में शुद्ध 'रे, ध' लगता है वह किस समय गाए जाने चाहिए?
सुबह 4:00 से 7:00
सुबह 7:00 से 10:00
रात्रि काल के समय
शाम 4:00 से 7:00
सुबह 7:00 से 10:00
शुद्ध रे, ध वाले राग प्रातः 7 से 10 बजे और इसी प्रकार रात्रि में 7 से 10 बजे गाए जाते हैं।
DSSSB PRT Music 2019
स्वर संयोग के अनुसार जिन रागों में कोमल 'ग, नी' लगता है, उन रागों को किस समय गाना चाहिए?
सुबह तथा रात्रि 10:00 से शाम 4:00
सुबह संध्या काल के समय
शाम संध्या काल के समय
इनमे से कोई नहीं
सुबह तथा रात्रि 10:00 से शाम 4:00
कोमल ग, नि वाले राग दिन के दूसरे प्रहर (10 से 4) और रात्रि के दूसरे प्रहर (10 से 4) में गाए जाते हैं।
UGC NET Music 2021
भैरव राग का थाट क्या है?
भैरव
काफ़ी
बिलावल
खमाज
भैरव
राग भैरव अपने ही नाम वाले 'भैरव' थाट का आश्रय राग है।
NVS TGT Music 2016
भैरव राग की जाति क्या है?
षाड़व- षाड़व
षाड़व-संपूर्ण
औडव – संपूर्ण
संपूर्ण- संपूर्ण
संपूर्ण- संपूर्ण
राग भैरव के आरोह और अवरोह दोनों में सातों स्वरों का प्रयोग होता है, इसलिए इसकी जाति सम्पूर्ण-सम्पूर्ण है।
UP PGT Music 2021
राग भैरव के वादी – संवादी स्वर क्या हैं?
म-सा
सा-म
ध_ रे_
रे,- ध
ध_ रे_
राग भैरव का वादी स्वर कोमल धैवत (ध_) और संवादी स्वर कोमल ऋषभ (रे_) है।
RPSC Music 2018
राग भैरव का गायन समय क्या है?
शाम 4:00 से 7:00
रात्रि का दूसरा पहर
प्रातः काल
रात्रि का तीसरा पहर
प्रातः काल
राग भैरव एक प्रातःकालीन संधिप्रकाश राग है, इसे सुबह के समय गाया जाता है।
KVS TGT Music 2018
राग भैरव के रे और ध स्वर किस प्रकार प्रयोग होते हैं?
शुद्ध रे , ध
तीव्र रे , ध
रे_ , ध_ (कोमल)
वर्जित
रे_ , ध_ (कोमल)
राग भैरव में ऋषभ (रे) और धैवत (ध) कोमल प्रयोग होते हैं, बाकी सभी स्वर शुद्ध लगते हैं।
UGC NET Music 2018
भैरव राग का प्रबल अंग क्या है?
उत्तरांग अंग
पुर्वांग अंग
उपयुक्त दोनों
इनमें से कोई नहीं
उत्तरांग अंग
भैरव राग का वादी स्वर 'ध' है जो सप्तक के उत्तरांग में है, इसलिए यह उत्तरांग प्रधान राग है।
UP TGT Music 2021
भैरव राग के न्यास के स्वर कौन से हैं?
सा, ग , ध
सा, रे, ग, ध
ग, ध, नी
सा, रे, प , ध
सा, रे, प , ध
राग भैरव में सा, रे, प और ध पर न्यास (ठहराव) किया जाता है।
BPSC Music Teacher 2023
राग रामकली, राग कलिंगडा, विभास और राग बंगाल भैरव किसके सम-प्रकृतिक राग हैं?
भैरव राग
बागेश्री राग
उपयुक्त दोनों
इनमें से कोई नहीं
भैरव राग
ये सभी राग भैरव थाट के हैं और इनकी प्रकृति राग भैरव के समान (सम-प्रकृतिक) होती है।
UGC NET Music 2019
राग भैरव के विषय में विद्वानों में किस स्वर पर विवाद है?
सा
नी
रे
ग
नी
कुछ विद्वान आरोह में निषाद (नी) का प्रयोग कम या वर्जित मानते हैं, जिस पर मतभेद है।
KVS PGT Music 2017
"ग म ध S S ध प, ग म रे S रे सा।" यह स्वर समूह किस राग से लिया गया है?
राग बागेश्री
राग भैरव
राग भैरव तथा बागेश्वरी का मिश्रण
इनमें से कोई नहीं
राग भैरव
यह स्वर संगति राग भैरव के चलन को दर्शाती है।
NVS Music 2016
बागेश्वरी राग का थाट क्या है?
भैरव
काफ़ी
बिलावल
खमाज
काफ़ी
राग बागेश्री (या बागेश्वरी) 'काफी' थाट से उत्पन्न राग माना जाता है।
DSSSB Music 2018
बागेश्वरी राग की जाति क्या है?
षाड़व- षाड़व
षाड़व-संपूर्ण
औडव – संपूर्ण
संपूर्ण- संपूर्ण
औडव – संपूर्ण
आरोह में 5 स्वर (औडव) और अवरोह में 7 स्वर (सम्पूर्ण) लगने के कारण इसकी जाति औडव-सम्पूर्ण है।
UGC NET Music 2021
बागेश्वरी राग में कौनसे स्वर वर्जित हैं?
अवरोह में ‘रे-प’
आरोह में ‘रे- प’
रे और प स्वर पूर्णतः वर्जित
आरोह में रे और ध
आरोह में ‘रे- प’
इस राग के आरोह में ऋषभ (रे) और पंचम (प) वर्जित होते हैं।
UP TGT Music 2016
राग बागेश्वरी के वादी – संवादी स्वर क्या हैं?
म-सा
सा-म
ध. रे_
रे,- ध
म-सा
राग बागेश्री का वादी स्वर मध्यम (म) और संवादी स्वर षडज (सा) है।
KVS TGT Music 2018
राग बागेश्वरी का गायन समय क्या है?
शाम 4:00 से 7:00
रात्रि का दूसरा पहर
प्रातः काल
रात्रि का तीसरा पहर
रात्रि का दूसरा पहर
राग बागेश्री का गायन समय रात्रि का दूसरा प्रहर (9 बजे से 12 बजे तक) माना जाता है।
BPSC Music Teacher 2023
बागेश्वरी राग में गंधार और निषाद स्वर किस तरह प्रयोग किए जाते हैं?
शुद्ध ग, शुद्ध नी
तीव्र ग, तीव्र नी
ग_ नि_ (कोमल)
वर्जित
ग_ नि_ (कोमल)
काफी थाट जन्य होने के कारण बागेश्री में गंधार (ग) और निषाद (नी) कोमल प्रयोग होते हैं।
DSSSB Music 2021
बागेश्वरी राग के न्यास के स्वर कौन से हैं?
सा, ग, ध
सा, रे, ग, ध
ग, ध, नी
सा, रे, प, ध
सा, ग, ध
इस राग में ठहरने (न्यास) के मुख्य स्वर सा, ग और ध हैं।
UGC NET Music 2019
राग भीमपलासी किसका सम-प्रकृतिक राग है?
भैरव राग
बागेश्री राग
उपयुक्त दोनों
इनमें से कोई नहीं
बागेश्री राग
राग भीमपलासी भी काफी थाट से है और इसके स्वर बागेश्री से काफी मिलते-जुलते हैं, इसलिए ये सम-प्रकृतिक हैं।
KVS PGT Music 2019
किस राग में 'सा म', 'ध म' और 'ध ग' की संगति बार-बार दिखाई देती है?
राग बागेश्री
राग भैरव
उपयुक्त दोनों
इनमें से कोई नहीं
राग बागेश्री
ये स्वर संगतियाँ (सा-म, ध-म, ध-ग) राग बागेश्री की पहचान और इसका मुख्य चलन हैं।
UP TGT Music 2016
किस राग में उसकी जाति को लेकर विद्वानों में मतभेद है?
राग भैरव
राग बागेश्री
उपयुक्त दोनों
इनमें से कोई नहीं
राग बागेश्री
कुछ विद्वान आरोह में पंचम का अल्पांश प्रयोग करके इसे षाड़व-सम्पूर्ण भी मानते हैं, इसलिए इसकी जाति पर मतभेद है।
NVS Music 2018
"ध़ नि. सा म, ध नि ध, म प ध ग, म ग रे सा।" यह स्वर समूह किस राग से लिया गया है?
राग बागेश्री
राग भैरव
राग भैरव तथा बागेश्वरी का मिश्रण
इनमें से कोई नहीं
राग बागेश्री
उपरोक्त स्वर विस्तार बागेश्री राग के चलन को स्पष्ट करता है।
BPSC Music Teacher 2023
राग भैरव तथा राग बागेश्री की प्रकृति क्या है?
दोनों रागों की प्रकृति चंचल
दोनों रंगों की प्रकृति गंभीर
राग भैरव की गंभीर तथा राग बागेश्री की चंचल
राग बागेश्री की गंभीर तथा राग भैरव की चंचल
दोनों रंगों की प्रकृति गंभीर
भैरव (प्रातःकालीन भक्ति रस) और बागेश्री (रात्रिकालीन) दोनों ही शांत और गंभीर प्रकृति के राग हैं, जिन्हें विलंबित ख्याल में बहुत सुंदरता से गाया जाता है।
UGC NET Music 2022